राजसमंद की ‘पन्नाधाय वनस्थली’ पानी की मार से संकट में, 35 हजार पौधों को बचाने के लिए ट्रस्ट ने सरकार से मांगी मदद
पानी की कमी से झुलस रही 100 बीघा ‘पन्नाधाय वनस्थली’, राजसमंद में 35000 पौधे लगाने वाले ट्रस्ट ने प्रशासन से मांगी आर्थिक और जल-सहायता। राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ उपखंड की कालिंजर पंचायत में स्थित मडरेचो का गुड़ा में यहाँ पर श्री आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट पिछले 10 वर्षों से पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा कार्य कर रहा है। ट्रस्ट ने ‘पन्नाधाय वनस्थली’ पर करीब सौ बीघा ज़मीन पर 35,000 से अधिक फलदार, छायादार और आयुर्वेदिक पौधे लगाए हैं। ट्रस्ट का लक्ष्य सवा लाख पौधे लगाने का है। आशापुरा मानव कल्याण ट्रस्ट के ट्रस्टी ने बताया कि विगत 10 वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम अच्छा मिला है, लेकिन अब इस महत्वपूर्ण परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए वे राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से मदद की अपेक्षा कर रहे हैं। ट्रस्टी ने बताया कि वनस्थली में पानी की भारी कमी है, जिससे पौधों के सूखने का खतरा है। उन्होंने मांग की है कि उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध कराया जाए। वनस्थली के निकट स्थित तालाब के नवीनीकरण की मांग की गई है। उनका कहना है कि तालाब में पानी आता तो है, पर ठहरता नहीं है। इस नवीनीकरण से वनस्थली के साथ-साथ गाँव के 600 से 700 घरों को भी पानी मिल सकेगा। उन्होंने वनस्थली की सुरक्षा और सुचारु संचालन के लिए स्थायी चौकीदार की व्यवस्था और अन्य ज़रूरी चीज़ों को उपलब्ध कराने की भी मांग की है। ट्रस्ट ने राज्य सरकार से इस पर्यावरण हितैषी कार्य को जारी रखने के लिए आर्थिक रूप से भी मदद देने की गुहार लगाई है। ट्रस्ट का कहना है कि यह वनस्थली न सिर्फ़ सैकड़ों जीवों के लिए आश्रय है, बल्कि पूरे गाँव के वातावरण और पर्यावरण संतुलन के लिए भी अत्यंत फायदेमंद है।
