रावण दहन नहीं, यहाँ होती है पूजा और शोक | मंडोर की अनोखी दशहरे की परंपरा | Jodhpur News
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रावण दहन नहीं, यहाँ होती है पूजा और शोक | मंडोर की अनोखी दशहरे की परंपरा | Jodhpur News

जब पूरा देश दशहरे पर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाता है, तब राजस्थान के जोधपुर के मंडोर क्षेत्र में दशहरे का रूप बिल्कुल अलग होता है। 👉 यहाँ रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि उनकी पूजा और शोक मनाया जाता है। 📌 मान्यता है कि मंडोर के श्रीमाली गोधा ब्राह्मण समुदाय स्वयं को रावण का वंशज मानते हैं। कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी, मंडोर की राजकुमारी थीं, इस नाते मंडोर को रावण का ससुराल माना जाता है। इसी कारण दशहरे के दिन यहाँ के अमरनाथ महादेव मंदिर में रावण की प्रतिमा का अभिषेक कर पूजा की जाती है, और शाम को समुदाय शोक प्रकट करता है।

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