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राजसमंद की पुकार 34 साल बाद भी अधूरा विकास अस्पताल–शिक्षा–रोज़गार–पर्यटन सब सवालों में

राजसमंद बोल रहा है… 34 साल पहले जिला बनने का सपना देखा गया था—एक विकसित, सशक्त और अवसरों से भरा राजसमंद। लेकिन 2025 में भी यह सपना अधूरा है। अस्पताल या ‘रेफर सेंटर’? जिला अस्पताल आज भी गंभीर मरीजों को संभाल नहीं पाता। कार्डियक यूनिट बजट में घोषित हुई—लेकिन धरातल पर ZERO काम। उदयपुर पहुँचते–पहुँचते कई मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। शिक्षा का हाल—पुरानी बिल्डिंग, नई उम्मीदें नहीं राजसमंद आज भी एक अच्छे सरकारी कॉलेज यूनिवर्सिटी टेक्निकल/रिसर्च सेंटर प्रोफेशनल एजुकेशन हब से वंचित है। टूटे क्लासरूम… खाली लैब्स… और भविष्य की कोई ठोस योजना नहीं। मार्बल–मिनरल का खजाना, लेकिन रोजगार शून्य देश को कच्चा माल देने वाला राजसमंद आज भी उद्योग नीति, टेक्नोलॉजी पार्क, स्किल डेवलपमेंट सेंटर और नई इंडस्ट्री से वंचित है। युवा रोज़गार की तलाश में पलायन करने को मजबूर हैं। पर्यटन—संभावनाएँ असीम, योजना नहीं नाथद्वारा में लाखों श्रद्धालु आते हैं… लेकिन राजसमंद झील, कुंभलगढ़, हल्दीघाटी, देवगढ़— इन स्थलों के विकास का कोई ठोस मॉडल आज भी नहीं। नेतृत्व में विज़न की कमी मुख्यमंत्री आते हैं… घोषणाएँ होती हैं… लेकिन राजसमंद के जनप्रतिनिधि विकास रोडमैप तक पेश नहीं कर पाते। 1991 की उम्मीदें — 2025 की निराशा राजसमंद पूछ रहा है— मेरा विकास कहाँ है? मेरा भविष्य कहाँ है? “मैं राजसमंद हूँ… और आज मैं खुद अपनी दर्द भरी कहानी सुना रहा हूँ…”

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